व्यसनाधीनता
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व्यसन करना केवल अपप्रवृत्ती नहीं है

व्यसन करना केवल अपप्रवृत्ती नहीं है. यह उससे कहीं अधिक विकृती है. वास्तव में, यह एक व्याधी है, जिसमें मन और शरीर दोनों ही अंकित हो जाते है. व्यसनाधीनता का व्यापक उदाहरण अर्थात मद्यप्राशन है, किन्तु अन्य कई ऐसे व्यसन है, जो दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं. व्यसनाधीनता क्यों बढ़ रही  है ? जैसा कि कुछ लोग सोचते हैं वैसे व्यसनाधीनता अर्वाचीन नही हैं. उस के उदाहरण प्राचीन ग्रंथों मेँ भी मिलते हैं. किन्तु व्यसनाधीन हुए  लोगों  की संख्या तथा उस के बढ़ने का प्रतिशत चिंतनीय है. प्राचीन काल मेँ भी…

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दारू के घातक व्यसन का नकारात्मक प्रभाव

दारू या मदिरा या शराब पीना एक घातक व्यसन है, जो केवल दारू पीनेवाले व्यक्ती को ही नहीं, पर उस के कुटुंब को भी धीरे धीरे खोकला कर देता है. दारू पीने के पश्चात मस्तिष्क में एंडोर्फिन नामक रसायन की मात्रा बढती है. यह रसायन मस्तिष्क को सब कुछ यथायोग्य चल रहा है, अच्छा है ऐसी अनुभूती देता है. इस अनुभूती से जुडी हुई है मस्तिष्क की एक विशेष प्रणाली जिसे ब्रेन रिवार्ड सिस्टिम के नाम से जाना जाता है. यह प्रणाली, मस्तिष्क को उन अनुभवों के कारणों से अधीन…

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तम्बाकू के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव

तम्बाकू एक मंदगती विष के समान है. किसी भी रूप में इस के अत्यधिक सेवन से मानव स्वास्थ्य पर अतिप्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. कॅन्सर का कारण कॅन्सर का कारण बननेवाले प्रमुख दोषियों में से एक है इसका नियमित रूप सेवन. तम्बाकू में लगभग सत्तर रसायन होते हैं, जो कॅन्सर का कारण बन सकते हैं. लगभग 50% लोग जो नियमित रूप से तम्बाकू का सेवन करते हैं, उन में स्वास्थ्य से संबंधित अनेक जटिल समस्यांए निर्माण हो जाती है, जिस के परिणामस्वरूप मृत्यु भी हो सकती है. तम्बाकू के उपयोग से…

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विज्ञानदृष्टी से व्यसनाधीनता – मादक पदार्थों का सेवन

सामान्यत: लोग यह नहीं जानते कि दूसरे लोग नशे के अधीन क्यों हो जाते हैं. यह एक व्यापक अयोग्य धारणा है कि जो लोग व्यसनाधीन हो जाते है, उन में नैतिकता का अभाव या त्रुटी रहती है या उनमें कम इच्छाशक्ति होती है.वास्तव में, मादक पदार्थों का सेवन तथा व्यसन, एक बहुत ही जटिल व्याधी है. केवल नीयत भली होने से या दृढ इच्छाशक्ती होने से व्यसन छुटने का प्रतिशत लगभग शून्य है. जो लोग, मादक पदार्थों का व्यसन छोडना चाहते हैं, उन्हें अपने स्वयं के मस्तिष्क से लड़ना पड़ता…

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मादक पदार्थों का व्यसन : जीवन को ध्वस्त करनेका मार्ग

अधिकांश मादक पदार्थों का व्यसन जडने का आरंभ,सामान्यत: समूहोंमें, समारोह में प्रयोगात्मक उपयोग के साथ होता है. अधिकतर स्थितियों में, जब प्रथम उपयोग का अनुभव, किसी भी प्रकार का निश्चित लाभ दिखाता है, तो कम से कम कुछ व्यक्तियों के लिए तो यह संभावना बनती ही है कि, वो उस पदार्थ का उपयोग, पुनश्च करे. धीरे-धीरे उपयोग की आवृत्ति में वृद्धि होती रहती है.  तथा धीरे-धीरे  वो वृद्धी, उस पदार्थ पे निर्भरता की ओर ले जाती है. अंततः यही निर्भरता व्यसन का अंतिम रूप लेती है.   कारण कोई व्यक्ति…

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