ऑर्थायु तेल

450.00 जी.एस.टी. सहित

ऑर्थायु तेल उच्च गुणवत्तापूर्ण एवम प्रभावी आवश्यक तेलों के एक संतुलित मिश्रण से निर्माण किया गया, ऑर्थायू तेल जोडों की पीडा के उपचार के लिये एक उत्तम औषधी है. इस के प्रयोग से, जोड़ों, गर्दन, कंधे, पीठ, पैरों की पीडा तथा मांसपेशियों में सूजन वा पीडा से आप मुक्ति पा सकते हो.

Gandhpura OilNilgiri OilTerpene OilCastor OilGuggul OilAjowan OilSonth OilLemon Grass OilKapuraPudina PhoolTil Oil

Description

ऑर्थायु तेल एक हर्बल उत्पाद है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के कई प्रकार के दर्द को कम करने में मदद करता है.

ऑर्थायु तेल की आवश्यकता क्यों होगी?

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है शारीरिक गतिविधियों की कमी हमारे शरीर और हड्डियों को कमजोर बनाती है, जिसके परिणामस्वरूप निश्चित रूप से जोड़ों में दर्द और सूजन होती है. इससे गठिया, मांसपेशियों की हानि, फटी मांसपेशियां, अपक्षयी ऊतक के अलावा कमजोरी भी होती है. जब मौसम बदलता है, खासकर सर्दियों में, दर्द और अधिक बढ़ जाता है. निस्संदेह सभी प्रकार के दर्द के लिए प्राकृतिक और हर्बल उपचारों पर स्विच करना सभी के लिए प्राथमिकता होगी, बशर्ते वे ऐसा कोई रास्ता खोज लें.

गठिया से संबंधित दर्द की पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेद सबसे अच्छा उपाय है.

प्राकृतिक अवयव जोड़ों और मांसपेशियों पर प्रभावी रूप से कार्य करते हैं, इस प्रकार दर्द को दूर करते हैं. यह सूजन को कम करने, रक्त परिसंचरण में सुधार, मांसपेशियों में तनाव को दूर करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. यह प्रभाव, यह दर्द और जकड़न से राहत देता है, और शरीर के विभिन्न दर्द जैसे घुटने का दर्द, कंधे का दर्द, पीठ दर्द, गठिया, फ्रोजन शोल्डर, टेनिस एल्बो और जोड़ों का दर्द. तेल का उपयोग करना आसान है और तुरंत राहत प्रदान करता है. मूल रूप से, यह प्रभावित क्षेत्र में तुरंत प्रवेश करता है और चिकना हुए बिना आसानी से अवशोषित हो जाता है.

ऑर्थायु तेल के लाभ

    • जोड़ों की पीडा से मुक्ती
    • पीठदर्द से मुक्ति
    • जोड़ों की सूजन का का इलाज करता है
    • प्रभावित क्षेत्र पर नियमित रगडने से जोड़ों को दृढता प्राप्त होती है एवम आपका चलनाफिरना सुलभ हो जाता है.
    • अस्थिसंधिशोथ (ऑस्टियो आर्थराइटिस), जखडे हुए जोड एवम गाऊट जैसी पीडा की स्थिती में उपयुक्त.
    • मोंच, मरोड का उपचार
    • मांसपेशियोंकी की पीडा से मुक्ति
    • गर्दन की अकडन से मुक्ति
    • रूमेटाइड आर्थराइटिस का उपचार
    • जखडे हुए जोडों को सुधारता है

 

विशेषताएं

    • 100% आयुर्वेदिक पीडा-मुक्ति तेल
    • पीडा से प्राकृतिक पद्धती से त्वरित एवम दीर्घकालिन परिणामकारक मुक्ति
    • कोई अन्य दुष्प्रभाव नहीं

उपयोग करने के निर्देश:

दर्द या प्रभावित जगह पर थोड़ा सा तेल लगाएं. तेल को पूरी तरह से अवशोषित होने तक त्वचा में धीरे से मालिश करें. लाभों को अधिकतम करने के लिए आवेदन के बाद क्षेत्र को गर्म रखने का प्रयास करें.

ऑर्थायु तेल 1 बोतल की पैकिंग में आता है और उपयोग के आधार पर 1 महीने तक चलने की उम्मीद है.

ऑर्थायु तेल पीडाहरी तेल है, पर इस से अधिक यह कहना चाहीए कि नियमित उपयोग करने पर वो जोडों की पीडा से, मांसपेशीयों की पीडा से मुक्ति देने वाली अद्भुत औषधी है. ऑर्थायु का उपयोग एक तेल की तरह ही सरल है. इस में कोई जटिल एवम लंबी प्रक्रिया के निर्देश नहीं हैं. बस प्रभावित क्षेत्रों पर एक ही गति से ऑर्थायु तेल की मालिश लगभग 5 से 10 मिनट तक करते रहे, जब तक आप को यह न लगे कि वो पूर्ण रूप से त्वचा के अंदर समा गया है, तथा त्वचा के उपर चिपचिपापन नहीं बचा है. इस का उपयोग दिन में कम से कम 3 से 4 बार तथा रात में सोने से पहले एक बार अवश्य किया जाना चाहिए.


 

ऑर्थायु तेल ट्रेडमार्क नंबर 3719095/96 के तहत एक पंजीकृत ब्रांड है. किसी भी अन्य अनधिकृत विक्रेताओं से नकली एवं जाली उत्पाद खरीदने से सावधान रहें. हमारे उत्पाद केवल इन नीचे दिए गए वेबसाइटों और संपर्क नंबरों पर उपलब्ध हैं.

telecart.com telecart.co.in teleshoppingmall.com vediva.in vediva.com

संपर्क नंबर : 9222220003 / 9222220004

विशेष विवरण

ऑर्थायू तेल पैकेज में शामिल हैं:

50 मिली की एक बोतल.

ऑर्थायू तेल की प्रमुख सामग्री:

गंधपुरा तेल, निलगिरी तेल, तारपीन तेल, एरण्ड तेल, गुग्गुळ तेल, अजवायन तेल, सोंठ तेल, लेमन ग्रास तेल, कपूर, ‎पुदिना सत्व और तिल तेल.

Gandhpura OilNilgiri OilTerpene OilCastor OilGuggul OilAjowan OilSonth OilLemon Grass OilKapuraPudina PhoolTil Oil

तेल के प्रत्येक मिली में शामिल हैं :

गंधपुरा तेल 20.00% निलगिरी तेल 14.00%
तारपीन तेल 11.00% एरण्ड तेल 5.00%
गुग्गुळ तेल 3.00% अजवायन तेल 3.00%
सोंठ तेल 2.00% लेमन ग्रास तेल 2.00%
कपूर 2.00% ‎पुदिना सत्व 2.00%
तिल तेल Q.S.

उपचार की विधि

  • हाथ में थोड़ा सा तेल लें.
  • प्रभावित क्षेत्र पर धीरे से तेल लगाएं.
  • मांसपेशियों में तेल प्रवाहित होने देने के लिए प्रभावित क्षेत्र की गोलाकार गति में मालिश करें.
  • प्रभावी परिणाम के लिए दिन में 3-4 बार और रात में भी तेल लगाएं.

सावधानी:

  • केवल बाहरी उपयोग के लिए.
  • खुले घाव या जलन पर न लगाएं.
  • आंख, कान, मुंह या नाक के संपर्क से बचें.
  • अगर आपको हर्बल तेलों और उत्पादों से एलर्जी है तो इसका उपयोग न करें.
  • यदि दर्द जारी रहता है तो अपने चिकित्सक से परामर्श करें.
  • बच्चो की पहुंच से दूर रखें.
  • ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें.

 

टिप्पणी: व्यक्तिगत परिणाम भिन्न हो सकते है.

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