nashaband

मादक पदार्थों का व्यसन : जीवन को ध्वस्त करनेका मार्ग

अधिकांश मादक पदार्थों की काव्यसनजडने का आरंभ,सामान्यत: समूहोंमें, समारोह मेंप्रयोगात्मक उपयोग के साथ होता है.अधिकतर स्थितियों में, जब प्रथम उपयोग का अनुभव, किसी भी प्रकार का निश्चित लाभ दिखाता है, तो कम से कम कुछ व्यक्तियों के लिए तो यह संभावना बनती ही है कि,वो उस पदार्थ का उपयोग,पुनश्च करे.धीरे-धीरे उपयोग की आवृत्ति में वृद्धि होती रहती है,  तथा धीरे-धीरे  वो वृद्धी, उस पदार्थ पे निर्भरता की ओर ले जाती है. अंततः यही निर्भरता व्यसन का अंतिम रूप लेती है.  

कोई व्यक्ति कितनी गति से इस मार्ग की क्रमणा करे, यह कई घटकों पर निर्भर करता है;जैसे कि उपयोग करने का कारण, अवसर, वित्तीय क्षमताएं या उपलब्धता का स्रोत आदि. उस मादक पदार्थ की  रासायनिक प्रकृति भी इस गति का एक महत्त्वपूर्ण कारण है. कुछ पदार्थ, दूसरों की तुलना में अधिक गति सेकिसी भी व्यक्ती को अपने लपेट में ले लेते है.

हमेशा एक ही तरह के अनुभव प्राप्त करने के लिए, कोई भी व्यसन, कम मात्रा एवम अनित्यता से आरंभ हो के अधिक मात्रा तथा अधिक आवृत्ति के मार्ग से ही गुजरती है. फिर एक समय आता है जब उस व्यक्ति को अच्छा प्रतीत होने के लिये उस व्यसन की आवश्यकता लगने लगती है. जैसे-जैसे उस मादक पदार्थ का उपयोग बढ़ता है, वो व्यक्ति उस बिंदु पर पहुँच जाता है,जहां से उस व्यक्ति को वापस घुम जाना लगभग असंभव लगता है.व्यसन को बलपूर्वक रोकने का हर प्रयास, कई विशिष्ट लक्षणों को दर्शाता है, जिन्हे ‘वापसी के लक्षण’ कहा जाता है. इन लक्षणोंमें प्रमुख है, अस्वास्थ्य का अनुभव करना. यही व्यसन है.

सामान्यत: व्यसन के मार्ग पर दिखनेवाले लक्षण निम्नलिखित है:

  • नियमित रूप से और अधिक मात्रामें सेवन करने की इच्छा.
  • सेवन करने के लिये, मानसिक स्तर पे अतितीव्र आग्रह की संवेदना.
  • सेवनके पश्चात के अनुभव की तुलना, भूतकाल में उसी या दुसरे पदार्थ के सेवन के पश्चात होनेवाले अनुभव से करना तथा वही प्रभाव पाने के लिए पदार्थ का अधिक मात्रा में उपयोग करने की आवश्यकता है ऐसे लगना.
  • उस मादक पदार्थ को सेवन करने के लिये अवसर ढुँढना तथा उसकी आपूर्ती के लिए योजना बनाना.
  • उस मादक पदार्थ के लिए धन की व्यवस्था करते समय, वित्तीय क्षमताओं तथा नैतिकता की भावना कोदुर्लक्षित करना.
  • नियमित रूप से दवा का सेवन शुरू करने से पूर्वकाल में, जो भीउत्तरदायित्वबनता था तथाजो  गतिविधियों सामान्यत: की जाती थी, उनको धीरे धीरे कम महत्व देना या भूल जाना.
  • व्यसन की आपूर्ति करने के लिए, जोखिम लेना.
  • व्यसन को छोडने की योजना बनाना पर उसपे अंमल न कर पाना. 
  • यह विश्वास करना कि जग ने आपके साथ अन्याय किया है, जिसके परिणामस्वरूप आप व्यसन के मार्ग पर चले हो.

Related posts

Leave a Comment